क्या जीवन होगा लेखक का, अपनी कहानियाँ बतलाता है या फिर एक निर्देशक का, जो उसको रूप दिलाता है
बन तो उद्यमी भी सकता हूँ, आखिर अपने नाम को किसी इमारत पे लिखा देख सकूँ
नाम हो जहाँ में मेरा, दौलत हो असीम किस चीज़ में है मेरी ख़ुशी, किस चीज़ में मेरा जुनून
इक सपना कैसे देख लूँ, जब सारे इतने खूब ना है हाथ में नौकरी, ना है कोई महबूब
सब पाने के क़ाबिल हूँ, पर शुरुआत कहाँ से हो किस ओर एकाग्रित करूँ मैं, जवानी की ये लौ
जब करना सब कुछ चाहूँ मैं, जब सपने मेरे सौ इक सपना कैसे देख लूँ, जब सारे इतने खूब
ना है हाथ में नौकरी, ना है कोई महबूब